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संस्कृत भाषा का महत्व

जानकारी हासिल करना मनुष्य का जन्म से ही स्वभाव रहा है ! यही कारण है कि आज हमारे सामने इतने आविष्कार हो चुके हैं कि आज हमारा जीवन सरलता से निकल रहा है ! लेकिन किसी भी कार्य को करने के लिए सबसे जरूरी है-भाषा ! बिना भाषा के हमारा कोई भी किया कार्य हम दूसरे को नहीं बता सकते ! आज संसार में 6900 भाषाओं का प्रयोग किया जाता है ! लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन भाषाओं का जननी कौन है ? संस्कृत भारत की एक शास्त्रीय भाषा है ! इसे देववाणी भी कहते हैं ! यह संसार की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है !संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है !संस्कृत ही एकमात्र साधन है जो अंगुलियों व जीभ को लचीला बनाती है !वैझानिक दृष्टि में संस्कृत भाषा का महत्व बढता जा रहा है ! विदेशों में भी संस्कृत का महत्व बढता जा रहा है ! संस्कृत भाषा संस्कार व संस्कृति सिखाती है !
यह अधिसंख्यक भारतीय भाषाओं की सम्पोषिका मानी जाती है ! राष्ट्रीय एकता एवं विश्वबन्धुत्व की भावना के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान है ! इसमें रचित साहित्य का सत्य,अहिंसा,राष्ट्रभक्ति,पृथ्वी-प्रेम,परोपकार,त्याग तथा सत्कर्म आदि भावनाओं के प्रसारण में अमूल्य योगदान है !प्राचीन साहित्य के दो रूप होते हैं-वैदिक साहित्य तथा लौकिक साहित्य!
संस्कृत-साहित्य हमें भाषा को शुद्ध पढ़ना व लिखना सिखाता है ! व्याकरण की दृष्टि से सबसे शुद्ध भाषा है ! यह भारतभूमि बुद्धिजीवों व गुणीजनों, साधुओं व विभिन्न सम्प्रदायों के लोगों की हैं ! भारत भूमि स्वर्ण के सामन है !
भारत में यह भाषा का सर्वाधिक महत्वशाली,व्यापक और सम्पन्न स्वरूप है ! इसके माध्यम से भारत की उत्कृष्टतम मनीषा, प्रतिभा,अमूल्य चिन्तन,मनन,विवेक,रचनात्मक,सर्जना और वैचारिक बुद्धि का अभिव्यंजन हुआ है ! हिंदू,बौद्ध,जैन आदि धर्मों के प्राचीन धार्मिक संस्कार की भाषा संस्कृत में है !
भारतस्य प्रतिष्ठे हे संस्कृतं चैव संस्कृति

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